निखिलधाम

साधकों का एक तीर्थ

“निखिलधाम एक तीर्थ स्थान है और जो शिष्य अपने वास्तविक तीर्थ स्थान पर जायेगा वह कुछ न कुछ पा कर ही लौटेगा | निखिलधाम अपने आप मे एक दिव्य स्थान है | वह तुम्हारी ऊर्जा का मूल स्त्रोत है क्यूंकि दीक्षा के समय तुम्हे निखिल ऊर्जा प्राप्त होती है| सद्गुरुदेव निखिलेश्वर जी महाराज वह पूर्ण चैतन्य प्रसन्न भाव, आशीर्वाद की मुद्रा मे वहाँ विराजमान है| यह मेरे ही नहीं लाखो शिष्यों के अनुभव है की उन्हें दिव्य अनुभूतिया  हुई है और उनकी कामनाएं पूर्ण हुई है क्यूंकि इस दिव्य स्थान की कुंडली जाग्रत है|सद्गुरु के दर्शन मात्र से ही आपको दिव्य अनुभूतियाँ होने लगती है|  निखिलधाम का पूरा क्षेत्र ही ऋषि मुनियो का स्थान रहा है| यहाँ अनेको लोगो ने साधनाए की है और सद्धियाँ   की है | जैन मुनि जिन्होंने भक्तामर स्त्रोत की रचना करि है उसी क्षेत्र मे आता है| महा विद्या साधक परिवार के लिए वह पूरा क्षेत्र आध्यात्मिक ऊर्जा का मूल स्त्रोत है |

जैसे काशी एक तीर्थ स्थान है , पृथ्वी पर ऐसा कोई समय नहीं रहा जब काशी तीर्थ न रहा हो| उसकी धारा बड़ी है अनगिनत पवित्र लोग  बुद्ध, महावीर, कबीर परम सिद्ध लोगो के पैर वहां पड़े है व्यक्ति खो जाता है परन्तु तीर्थ बना रहता है| बुद्ध काशी आये खो गए, शंकराचार्य जी  काशी आये परन्तु खो गए पैर काशी आज भी शिव स्थान है परम तीर्थ स्थान है | ऐसे ही निखिलधाम का पूरा क्षेत्र मंदिर बनने से पहले भी तीर्थ स्थान था और आज भी है और आगे भी रहेगा| लोग यो आते जाते रहेंगे| प्रत्येक तीर्थ स्थान का अपना महत्व होता है| निखिल शिष्यों को जो भो प्राप्त होगा यहीं से होगा |

कैलाश हिन्दुओ का तीर्थ स्थान है तिब्बत, बौद्ध समुदाय का तीर्थ सथल है यहाँ आपको पंडा पुजारी नहीं मिलेंगे निखिलधाम मे भी पंडा पुजारी नहीं मिलेंगे| मैं भी वहां पंडा पुजारी रख कर भीड़ इक्क्ठी नहीं करना चाहती ,करने को बहुत  कुछ किया जा सकता है परन्तु सतगुरु को शांती  पसंद है| जिसके अंदर थोड़ा भी सामंजसय है उनको यह स्थान पूरा पूरा बसा हुआ नजर आएगा यहाँ बस्तिया नजर आएँगी यहाँ कौन कौन बसा है उनकी कितनी बस्तियाँ है आप खुद महसूस करेंगे|

नखिलधाम बहुत बड़ा स्थान है जहाँ दिव्य अलौकिक पक्षी , जड़ी बूटियाँ एवं पेड़ पौधे है| न केवल निखिलधाम मे उसके आस पास के बहुत बड़े क्षेत्र मे वृक्षारोपण किया गया है| निखिलधाम मे मीठे रसीले फल है , इस  दिव्य स्थान मे जहाँ निखिल ऊर्जा का प्रवाह होता है  एक एक वृक्ष पर अनगिनत फल लगे रहते है, यहाँ के विभिन्न रंग बिरंगे फूल आप मे नयी ऊर्जा का प्रभाव कर देते है| मैंने कई बार सतगुरु के हाथ , चरणों मे निलकंठ पक्षी को बैठे हुए देखा है|

निखिलधाम के मुख्य द्वार पर एक तरफ परम सिद्ध जाग्रत गणेश मंदिर है  और  दूसरी तरफ हनुमान मंदिर है| थोड़ा आगे ही विशाल अलौकिक पक्षीराज  – शरभ देव की स्थापना है, शरभ मंदिर मे शत्रु नाशिनी और कामधेनु की भी स्थापना  है| दस महाविद्या की परम सूंदर मूर्तियों की भी स्थापना है | मदिर के बिच मे विशाल शिव लिंग विराजमान है और उनके सामने नंदीजी बैठे है | नखिलधाम मे सहस्त्र लिंगम की भी स्थापना  है, भैरव की स्थापना  है नाग मंदिर है और दिव्य शनि शिला है जिस पर २४ घंटे प्राकृतिक  फूलो की वर्षा होती रहती है |

निखलधाम मे विशाल सगुरु श्री निखिलेशवरानन्द जी का मंदिर है जहाँ वह अपने शिष्यों को दर्शन और आशीर्वाद देते है| पूरा क्षेत्र विशाल और सूंदर है , नज़दीक मे ही  कल कल बहती हुई नदी है | विशाल  किले नुमा दीवारों से सुसज्जित निखिलधाम एक दिव्य अलौकिक तीर्थ है| यह सब कुछ तुम साधको और शिष्यों के सहयोग से हो पाया है|”

गुरु माँ डॉ. साधना